उत्तर प्रदेश जल निगम के कर्मचारियों और पेंशनरों ने मंगलवार को प्रदेशभर के जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया। इस दौरान जल निगम संघर्ष समिति ने श्वेत पत्र जारी किया और कामकाज पूरी तरह ठप रहा।

सहारनपुर में संयोजक अरुण कुमार ने बताया
सहारनपुर में संयोजक अरुण कुमार ने बताया कि 1975 तक जल निगम राजकीय विभाग था। वेतन-पेंशन ट्रेजरी से मिलते थे और कार्यों पर 22 प्रतिशत सेन्टेज राशि भारित होती थी। निगम बनने के बाद शासन ने ट्रेजरी से भुगतान बंद कर दिया। 1997 में सेन्टेज राशि घटाकर 12.5 प्रतिशत कर दी गई। सितंबर 2021 में निगम का नगरीय और ग्रामीण में विभाजन हुआ।

एक निगम में छह माह से वेतन-पेंशन नहीं मिला
एक निगम में छह माह से वेतन-पेंशन नहीं मिला है। दूसरे में कर्मचारियों को 14 साल से बोनस का भुगतान नहीं हुआ है। दोनों निगम जीपीएफ की कटौती का निवेश नहीं कर रहे हैं। विभाजन के बाद सेन्टेज राशि घटकर 5 प्रतिशत रह गई है। इससे पेयजल और सीवर व्यवस्था प्रभावित हुई है। कर्मचारियों ने मांग की है कि जल निगम को सेन्टेज-मुक्त घोषित किया

वेतन-पेंशन ट्रेजरी से जोड़ा जाए और दोनों निगमों का पुनः एकीकरण किया जाए। कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री से जल निगम को नौकरशाही के फैसलों से बचाने की अपील की है। उन्होंने कैशलेस चिकित्सा सुविधा की मांग भी की है। संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो राज्यव्यापी आंदोलन तेज किया जाएगा।








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