देहरादून (जॉलीग्रांट), 11 फरवरी 2026 – स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के 8वें दीक्षांत समारोह ने आज गरिमामय और प्रेरणादायी माहौल में संपन्न हुआ। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा और विशिष्ट अतिथि के रूप में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शिरकत की। इस अवसर पर विभिन्न संकायों से 1001 छात्र-छात्राओं को डिग्रियां प्रदान की गईं, साथ ही सेंटर फॉर डिस्टेंस एंड ऑनलाइन एजुकेशन (CDOE) का शुभारंभ भी किया गया।

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा का संदेश
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने दीक्षांत को संबोधित करते हुए कहा:
“डिग्री केवल एक शैक्षणिक पड़ाव नहीं है, बल्कि जीवन की नई यात्रा की शुरुआत है। डिग्री के साथ मानव निर्माण और समाज के प्रति उत्तरदायित्व भी जुड़ा होता है।”
उन्होंने कहा कि अमृतकाल के अगले 25 वर्ष विकसित भारत के निर्माण के निर्णायक वर्ष होंगे, जिनमें आज के युवा साक्षी ही नहीं, कर्ताधर्ता भी बनेंगे। उन्होंने छात्रों से अपील की कि प्राप्त शिक्षा का उपयोग मानवता, गरीब और अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के कल्याण के लिए करें।
नड्डा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वास्थ्य क्षेत्र की उपलब्धियों का जिक्र किया – आयुष्मान भारत योजना, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में सुधार, टीबी-मलेरिया-डायरिया उन्मूलन में प्रगति और कैंसर के अर्ली डिटेक्शन जैसी पहलें। उन्होंने विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. विजय धस्माना के नेतृत्व की सराहना की और कहा कि संस्थान मानव सेवा, चिकित्सा और शिक्षा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।

मुख्यमंत्री धामी का प्रेरक संबोधन
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी डिग्री प्राप्तकर्ताओं को बधाई देते हुए कहा:
“उत्तराखंड की युवा शक्ति राज्य की सबसे बड़ी ताकत है। स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय ने शिक्षा, चिकित्सा और जनसेवा के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान बनाई है।”
उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना, टेलीमेडिसिन और पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार में केंद्र सरकार का उल्लेखनीय सहयोग मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने “प्रधानमंत्री मोदी जी के उत्तराखंड के तीसरे दशक” की अवधारणा का जिक्र करते हुए रिवर्स पलायन, जल-जंगल संरक्षण, दूरस्थ क्षेत्रों तक सड़क-बिजली-इंटरनेट कनेक्टिविटी, पर्यटन विकास, एसडीजी रैंकिंग, मत्स्य विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सकारात्मक बदलावों की बात की।
उन्होंने छात्रों से आह्वान किया:
“अपने ज्ञान, कौशल और संवेदनशीलता का उपयोग राष्ट्र निर्माण में करें, ताकि आपके कार्यों में करुणा, मानवता और सेवा की भावना स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो।”
शिक्षा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत का बयान
शिक्षा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड स्वास्थ्य के क्षेत्र में मानव संसाधन और संरचनात्मक स्तर पर बेहतर कार्य कर रहा है। उन्होंने स्वामी राम हिमालयन संस्थान के योगदान की सराहना की और कहा कि केंद्र सरकार से लगातार अनुकरणीय सहयोग मिल रहा है।

विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. विजय धस्माना का संदेश
संस्थान के अध्यक्ष डॉ. विजय धस्माना ने शिक्षा को केवल डिग्री नहीं, बल्कि आत्मज्ञान, सशक्तिकरण और परिवर्तन का माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि संस्थान का मुख्य फोकस मानव सेवा और नैतिकता के माध्यम से बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करना है।
समारोह की मुख्य उपलब्धियां
- 1001 छात्र-छात्राओं को मेडिकल, एलाइड हेल्थ, नर्सिंग, मैनेजमेंट, इंजीनियरिंग, योग विज्ञान एवं बायो-साइंसेज संकायों में डिग्रियां प्रदान की गईं।
- 31 विद्यार्थियों को अकादमिक अवार्ड
- 2 छात्रों को स्वामी राम बेस्ट ग्रेजुएट अवार्ड
- 14 शोधार्थियों को पीएचडी उपाधि
- CDOE (Center for Distance and Online Education) का शुभारंभ – NAAC A+ ग्रेड के कारण UGC से मान्यता प्राप्त ऑनलाइन पाठ्यक्रम शुरू
- उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक झलक प्रस्तुत की गई
मौके पर मौजूद प्रमुख लोग
कार्यक्रम में उपस्थित थे:
- केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा
- मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी
- शिक्षा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत
- विश्वविद्यालय अध्यक्ष डॉ. विजय धस्माना
- कुलपति डॉ. राजेंद्र डोभाल
- आर.एस.एस. अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. दिनेश
- आर.एस.एस. प्रांत प्रचारक डॉ. शैलेन्द्र
- विधायक श्री विनोद चमोली, श्री मुन्ना सिंह चौहान, श्री बृजभूषण गैरोला
- उत्तरांचल उत्थान परिषद संरक्षक श्री प्रेम बड़ाकोटी
- अन्य शिक्षकगण, अभिभावक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी
यह दीक्षांत समारोह न केवल छात्रों के लिए मील का पत्थर था, बल्कि उत्तराखंड में शिक्षा, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक विरासत के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।
उत्तराखंड में शिक्षा और सेवा का नया अध्याय
आपको क्या लगता है – क्या ऐसी संस्थाएं युवाओं को राष्ट्र निर्माण के लिए तैयार कर पा रही हैं?







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